03 जून 2026
डॉ. आशुतोष दास शर्मा द्वारा
छत्तीसगढ़ में मुँह के कैंसर से बचाव: हर परिवार को यह जानना चाहिए
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एक खतरा जो सबके सामने है — फिर भी अनदेखा है
रायपुर के किसी भी बाज़ार में — पंडरी, शास्त्री बाज़ार, तेलीबांधा — हर पान की दुकान पर गुटखा, खैनी और तंबाकू खुलेआम बिकता है। छत्तीसगढ़ में भारत के सबसे अधिक तंबाकू उपभोग वाले राज्यों में से एक है — और इसका नतीजा बहुत भारी है: हमारे राज्य में कैंसर के कुल मामलों में मुँह का कैंसर सबसे बड़ा हिस्सा लेता है।
दुखद बात यह नहीं है कि ये संख्याएँ बढ़ रही हैं। दुखद यह है कि मुँह का कैंसर सबसे अधिक रोकने योग्य और जल्दी पकड़ में आने वाले कैंसरों में से एक है — फिर भी रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और कोरबा के अधिकांश मरीज़ तब डॉक्टर के पास आते हैं जब बीमारी पहले से काफी बढ़ चुकी होती है।
अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टिट्यूट (AOI-BCR), जोरा, रायपुर में एक रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के रूप में मैं हर हफ्ते यही देखता हूँ। यह ब्लॉग मेरी कोशिश है इसे बदलने की — एक परिवार से शुरू करके।
मुँह का कैंसर क्या होता है?
मुँह का कैंसर (ओरल कैंसर) मुँह के किसी भी हिस्से में हो सकता है — होंठ, जीभ, गाल की अंदरूनी परत, मसूड़े, मुँह का तला, और तालू। यह गले के पिछले हिस्से (ऑरोफैरिंक्स) में भी हो सकता है।
छत्तीसगढ़ में सबसे ज़्यादा मामले जीभ, गाल की अंदरूनी परत और मुँह के तले पर देखे जाते हैं — ठीक वहाँ जहाँ लोग तंबाकू रखते हैं।
छत्तीसगढ़ में इतना ख़तरा क्यों है?
छत्तीसगढ़ में मुँह के कैंसर की मुख्य वजहें हैं:
- गुटखा और खैनी — अरेका नट और तंबाकू का मिश्रण, जिसे लोग घंटों गाल में दबाए रखते हैं
- चूने के साथ तंबाकू — जो सीधे मसूड़ों और गाल की अंदरूनी परत पर लगाया जाता है
- बीड़ी पीना — रायपुर ज़िले के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में आम
- पान मसाला — बिना तंबाकू के भी, अरेका नट अकेले WHO द्वारा Group 1 कार्सिनोजन घोषित है
- शराब का सेवन — तंबाकू के साथ मिलकर मुँह के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है
ये आदतें छत्तीसगढ़ के कई परिवारों में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को मिलती हैं — इसीलिए परिवार के अंदर से जागरूकता शुरू करना सबसे ज़रूरी है।
शुरुआती संकेत — इन्हें पहचानें, देर न करें
मुँह का कैंसर अपनी शुरुआत में लगभग हमेशा दिखाई देता है — इसीलिए जागरूकता से जल्दी पहचान पूरी तरह संभव है। इन संकेतों पर ध्यान दें:
- मुँह में कोई छाला या घाव जो 2–3 हफ्तों में ठीक न हो
- मुँह के अंदर कहीं भी सफेद धब्बा (leukoplakia) या लाल धब्बा (erythroplakia)
- होंठ, मसूड़े या मुँह के अंदर कोई गाँठ, मोटापन या खुरदरापन
- चबाने, निगलने या जबड़ा-जीभ हिलाने में तकलीफ
- मुँह, जबड़े या गर्दन में लगातार सुन्नपन या दर्द
- गर्दन में सूजन या गाँठ जो ठीक न हो रही हो
- मुँह से बिना किसी कारण खून आना
- गले में कुछ अटका होने जैसा लगातार एहसास
इनमें से कोई भी लक्षण "बस एक संक्रमण है" या "अपने आप ठीक हो जाएगा" कहकर नज़रअंदाज़ न करें। अगर कोई भी लक्षण 2 हफ्ते से ज़्यादा रहे — तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ। AOI-BCR, जोरा, रायपुर में हमारी ऑन्कोलॉजी टीम एक OPD विज़िट में ही जाँच और सलाह दे सकती है।
ओरल सब-म्यूकस फाइब्रोसिस — एक खामोश चेतावनी
छत्तीसगढ़ में गुटखा और अरेका नट उपयोगकर्ताओं में एक विशेष स्थिति बहुत आम है — ओरल सब-म्यूकस फाइब्रोसिस (OSMF)। इसमें गालों की अंदरूनी परत सख्त और सफेद होने लगती है, और धीरे-धीरे मुँह पूरा खोलना मुश्किल हो जाता है।
OSMF एक प्री-कैंसर स्थिति है। अगर इलाज न हो तो यह मुँह के कैंसर में बदल सकती है। अच्छी खबर यह है: अगर जल्दी पकड़ में आए और तंबाकू छोड़ दिया जाए, तो इसे रोका जा सकता है।
अगर आप या परिवार में कोई नियमित गुटखा खाता है और मुँह पूरा खोलने में दिक्कत होती है — तुरंत ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलें। इंतज़ार न करें।
रायपुर में व्यक्तिगत कैंसर उपचार — अब दूर जाने की ज़रूरत नहीं
छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ा और नुकसानदेह भ्रम यह है: "कैंसर का इलाज मतलब मुंबई, हैदराबाद या दिल्ली जाना।"
यह अब सच नहीं है।
अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टिट्यूट (AOI-BCR), जोरा, रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कैंसर देखभाल — जिसमें मुँह का कैंसर भी शामिल है — अब यहीं छत्तीसगढ़ में उपलब्ध है। हमारी सेवाओं में शामिल है:
- व्यक्तिगत कैंसर उपचार योजना — हर मरीज़ का इलाज उनके ट्यूमर की जगह, स्टेज, पैथोलॉजी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के आधार पर तैयार किया जाता है।
- उन्नत रेडिएशन ऑन्कोलॉजी — IMRT, IGRT और VMAT जैसी तकनीकें जो ट्यूमर को सटीक निशाना बनाती हैं और स्वस्थ ऊतकों को बचाती हैं।
- बहु-विशेषज्ञ ट्यूमर बोर्ड — सर्जिकल, रेडिएशन और मेडिकल ऑन्कोलॉजी की टीम मिलकर हर केस की समीक्षा करती है।
- ओरल कैंसर स्क्रीनिंग — तंबाकू उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध, लक्षण न होने पर भी।
- पुनर्वास सहायता — इलाज के बाद बोलने, निगलने और पोषण में मदद।
रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोरबा, जगदलपुर और पूरे छत्तीसगढ़ के मरीज़ों को वही देखभाल मिल रही है जो पहले केवल महानगरों में उपलब्ध थी।
मुँह के कैंसर का इलाज कैसे होता है?
इलाज कैंसर की स्टेज और जगह पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज (Stage I और II) में आमतौर पर:
- सर्जरी — ट्यूमर हटाना, जो अक्सर छोटी और सहनीय प्रक्रिया होती है
- रेडिएशन थेरेपी — आधुनिक तकनीक से सटीक, कम अवधि का उपचार
उन्नत स्टेज में सर्जरी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी का संयोजन हो सकता है। मुख्य बात यह है: जितनी जल्दी आएँगे, इलाज उतना आसान और प्रभावी होगा।
AOI-BCR रायपुर में हम सुनिश्चित करते हैं कि मरीज़ और परिवार इलाज के हर कदम को पूरी तरह समझें। रायपुर में हमारी रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट टीम सर्जिकल और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ मिलकर हर मरीज़ के लिए सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करती है।
अपने परिवार को बचाएँ — आज से शुरू करें
- सभी तंबाकू उत्पाद बंद करें — गुटखा, खैनी, बीड़ी, सिगरेट। तंबाकू का कोई सुरक्षित स्तर नहीं है।
- पान मसाला बंद करें — बिना तंबाकू के भी, अरेका नट कैंसरकारी है।
- हर महीने खुद जाँच करें — टॉर्च से मुँह के अंदर देखें। कोई भी सफेद-लाल धब्बा, घाव या गाँठ दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- सालाना ओरल कैंसर स्क्रीनिंग — अगर आप या परिवार में कोई किसी भी रूप में तंबाकू लेता है, तो AOI-BCR, जोरा, रायपुर में स्क्रीनिंग करवाएँ। इसमें 10 मिनट लगते हैं और यह आपकी जान बचा सकती है।
- बच्चों को जल्दी बताएँ — छत्तीसगढ़ में कई लोग किशोरावस्था में ही तंबाकू शुरू कर देते हैं। घर पर एक बातचीत सबसे शक्तिशाली बचाव है।
रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर के परिवारों के लिए एक ज़रूरी बात
अगर आपके परिवार में किसी के मुँह में ऐसा घाव है जो ठीक नहीं हो रहा, जबड़े में अकड़न है, या गर्दन में कोई गाँठ है — तो देर न करें। ये लक्षण सामान्य नहीं हैं, और ये अपने आप ठीक नहीं होते।
शुरुआती मुँह का कैंसर बहुत हद तक ठीक हो सकता है। उन्नत अवस्था में यह एक बहुत कठिन लड़ाई बन जाती है। दोनों के बीच का फर्क अक्सर बस कुछ हफ्तों का होता है।
अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टिट्यूट (AOI), जोरा, रायपुर में ओरल और हेड-नेक कैंसर के अनुभवी रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट के रूप में, मेरी छत्तीसगढ़ के हर परिवार से यही विनती है: डर या देरी को कभी इसका कारण मत बनने दें कि कोई अपना हमारे पास बहुत देर से पहुँचे।
एक ज़रूरी संदेश
"मुँह का कैंसर ज़ोर से नहीं आता। यह एक छोटे से घाव, एक सफेद धब्बे, एक अकड़े हुए जबड़े से शुरू होता है — जिसे हम 'छोटी सी बात' कहकर टाल देते हैं। इसे मत टालिए।"
अगर आप किसी भी रूप में तंबाकू लेते हैं — स्क्रीनिंग करवाएँ। अगर कोई संकेत दिखे — अभी कदम उठाएँ। रायपुर में व्यक्तिगत कैंसर उपचार उपलब्ध है। दूर जाने की ज़रूरत नहीं — बस शुरुआत करने की ज़रूरत है।
— डॉ. आशुतोष दास शर्मा, रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट, AOI-BCR, जोरा, रायपुर